UP के कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या; जेलर-डिप्टी जेलर सस्पेंड, CM योगी ने दिए जांच के आदेश

लखनऊ: जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं और तत्काल प्रभाव से बागपत जेल के जेलर को निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने कहा,” जेल परिसर के अंदर ऐसे प्रकरण का होना अत्यंत गंभीर मामला है. इस मामले में जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.”Gangster Munna Bajrangiआज सुबह पूर्वांचल के कुख्यात माफिया डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मार कर हत्या कर दी गई. बीएसपी के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में उसकी आज ही बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी और इसी के लिए उसे झांसी से बागपत लाया गया था.

कुख्यात सुनील राठी और विक्की सुनहेड़ा के साथ उसे तन्हाई बैरक में रखा गया था. सुनील पहले रुड़की जेल में बंद था और वहां उसने अपनी जान का खतरा बताया था. उसने कोर्ट से बागपत जेल शिफ्ट करने की गुहार लगाई थी जिसके बाद उसे बागपत जेल शिफ्ट कर दिया गया था.

90 के दशक में मुख्तार गैंग में शामिल
90 के दशक में मुन्ना बजरंगी ने पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी का दामन थामा। मुख्तार का गैंग मऊ से ऑपरेट हो रहा था लेकिन पूरे पूर्वांचल में जुर्म की दुनिया में मुख्तार की तूती बोल रही थी। मुख्तार ने इसी दौरान अपराध से सियासत का रुख किया। 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मुख्तार ने मऊ से विधानसभा का चुनाव जीता। इसके बाद मुन्ना का सरकारी ठेकों में दखल बढ़ता गया। इस दौरान वह लगातार मुख्तार अंसारी की सरपरस्ती में काम करता रहा।

कृष्णानंद राय हत्या में आरोपी
पूर्वांचल में इसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की सनसनीखेज हत्या हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई इस मामले में मुन्ना बजरंगी का सुराग ढूंढ रही थी। उस पर सात लाख रुपये के इनाम का भी ऐलान हुआ। पुलिस से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था।

कौन है सुनील राठी

सुनील राठी उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराध जगत का बड़ा नाम है. अपने पिता की हत्या के बाद उसने चार हत्याएं की थीं. उसकी मां पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी के टिकट पर छपरौली विधानसभा से चुनाव भी लड़ चुकी हैं. मुन्ना की पत्नी सीमा सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सीएम से गुहार लगाई थी. सीमा ने दावा किया था कि एसटीएफ मुन्ना बजरंगी को मुठभेड़ में ढेर करने की फिराक में है. 29 जून को उसने कहा था कि कुछ प्रभावशाली नेता और अधिकारी मुन्ना की हत्या करने का षड्यंत्र रच रहे हैं.

सीमा ने कहा कि जेल में ही उसके पति के खाने में जहर देने की कोशिश की गई थी. सीसीटीवी फुटेज में भी इसकी रिकॉर्डिग है, जिसमें एक एसटीएफ अधिकारी जेल में ही मुन्ना बजरंगी को मारने की बात कह रहे हैं. इसकी शिकायत कई अधिकारियों और न्यायालय से की, लेकिन कहीं से भी सुरक्षा नहीं मिली.

कौन है मुन्ना बजरंगी

1982 से शुरू हुआ मुन्ना बजरंगी का अपराधिक सफर आज खत्म हो गया. उसके बारे में कहा जाता था कि वो सुपारी लेकर किसी की भी हत्या करा सकता है. जौनपुर के कसेरूपूरेदयाल गांव का रहने वाले मुन्ना बजरंगी का नेटवर्क मुंबई, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में फैला हुआ था. 1995 में यूपी एसटीएफ मुठभेड़ में मुन्ना गोली खा गया था लेकिन वह बच गया. इस बीच मुन्ना से मुख्तार अंसारी ने हाथ मिला लिया. इस गठजोड़ का परिणाम यह निकला कि मुन्ना ने 2005 में मुहम्मदाबाद के बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी.

राय की हत्या के बाद मुन्ना बजरंगी अपराध की दुनिया में दहशत का दूसरा नाम बन गया. आरोप है कि अपने नाम के खौफ का इस्तेमाल करते हुए मुन्ना ने करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूली. 2012 में मड़ियाहू विधानसभा से वह चुनाव भी लड़ा लेकिन उसे करारी शिकस्त मिली.

Web Title : UP's infamous Mafia don Murna Bajrangi murder in Baghpat jail; Jailer-deputy jailer suspend