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जयपुर/ नई दिल्ली। सत्रहवीं लोकसभा में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए अपना कैंडिडेट तय कर लिया है। राजस्थान के कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी सांसद ओम बिड़ला लोकसभा स्पीकर पद के उम्मीदवार होंगे। लोकसभा सचिवालय ने मंगलवार को बताया कि इस पद के लिए बिड़ला की ओर से उनकी दावेदारी का नोटिस मिल गया है। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव बुधवार को होना है। बिड़ला के नाम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने एक बार फिर अपने निर्णय से सबको चौंकाया है। राजस्थान के कोटा से बीजेपी सांसद ओम बिड़ला लोकसभा के नए स्पीकर होंगे। स्पीकर के पद लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं और वरिष्ठ नेताओं के नाम पर मंथन चल रहा था। लोकसभा अध्यक्ष बनने की रेस में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, राधामोहन सिंह, रमापति राम त्रिपाठी, एसएस अहलुवालिया और डॉ. वीरेंद्र कुमार जैसे कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे। ओम बिड़ला के नामांकन के बाद बुधवार को सदन में इस पर मतदान होगा। क्योंकि एनडीए के पास लोकसभा में बहुमत है, ऐसे में उनका ही लोकसभा स्पीकर बनना तय माना जा रहा है।बिड़ला भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्वसनीय माने जाते हैं। लोकसभा का ये सत्र 26 जुलाई तक चलेगा। करीब 40 दिन तक चलने वाले इस बजट सत्र में तीन तलाक जैसे अहम बिलों पर चर्चा होगी वहीं आम बजट पर खास फोकस रहेगा। मोदी सरकार 5 जुलाई को आम बजट पेश करने जा रही है।
समग्र सोच वाले व्यक्तित्व की तलाश पूरी
सूत्रों की माने तो लोकसभा अध्यक्ष के लिए अमित शाह को एक समग्र सोच वाले व्यक्तित्व की तलाश थी क्योंकि राजनाथ सिंह ने स्पीकर बनने से इनकार कर दिया था। बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाने में संघ का भी अहम रोल रहा हैं। जानकारी के अनुसार अमित शाह लगभग 30 सालों से ओम बिड़ला से परिचित है। 1987 में दोनों ही भाजयुमो के पहली बार सदस्य बने थे। आगे चलकर बिड़ला भाजयुमो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने। भाजपा के कुछ नेताओं की माने तो लोकसभा अध्यक्ष लिए ओम बिड़ला का नाम संवैधानिक पद पर बैठे एक दिग्गज नेता ने सुझाया। शाह कोर टीम के एक कद्दावर चेहरे ने बिड़ला के लिए पूरी पैरवी की। अब ओम बिड़ला लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद दिग्गजों की फहरिस्त में शामिल हो गए।
जाखड़ रह चुके हैं अध्यक्ष
अगर राजस्थान की बात करें तो बिड़ला से पहले बलराम जाखड़ भी लोकसभा अध्यक्ष रह चुके हैं। सीकर से सांसद बने जाखड़ लंबे समय तक लोकसभा स्पीकर रहे। अब ओम बिड़ला को यह अवसर मिला है।
केन्द्र में अब और बढ़ गया राजस्थान का दबदबा
दिल्ली की सियासत में राजस्थान का कद और बढ़ गया है। राजस्थान से मोदी 2.0 सरकार में एक ओर केन्द्रीय कैबिनेट में जगह मिली वहीं दूसरी ओर लोकसभा अध्यक्ष का पद भी राजस्थान के खाते में आया है। मोदी वन के कार्यकाल को देखे तो राजस्थान से केन्द्रीय केबिनेट में किसी को जगह नहीं मिली थी। प्रदेश से लगातार 16वीं और 17वीं लोकसभा में भाजपा के खाते में 25 की 25 सीटें दी थी लेकिन इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी लोकसभा में प्रदेश के मतदाताओं ने मोदी में विश्वास जताया। सम्भवत उसी का नतीजा है कि राजस्थान को लोकसभा का सिरमौर पद यानी लोकसभा अध्यक्ष का पद भी मिला। राजस्थान की सियासत के दबदबे की गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है। वजह भी साफ है कि राजस्थान के मतदाताओं ने लगातार दो बार से लोकसभा चुनावों में मोदी में विश्वास जताया । मोदी 2.0 में राजस्थान को पहले कैबिनेट में जगह मिली और गजेन्द्र सिंह शेखावत को शामिल किया। साथ में दो राज्य मंत्री भी मोदी मंत्री परिषद में शामिल हुए। अब 17वीं लोकसभा के अध्यक्ष का पद भी राजस्थान के खाते में आया है।सदन के सितारे से सबसे बड़े सदन तक का सफर
राजस्थान में 13वीं विधानसभा के कार्यकाल के दौरान उन्होंने 500 सवाल पूछे थे। विधानसभा में बहस के दौरान सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के लिए बिड़ला को सम्मान मिला और उनका नाम सदन के सितारे में 6 बार शामिल किया गया। राजनेता होने के साथ-साथ ओम बिड़ला एक व्यवसाई भी हैं। केंद्र की राजनीति में आने से पहले बिड़ला राजस्थान की सियासत में सक्रिय रहे हैं। वह कोटा दक्षिण सीट से 3 बार विधायक निर्वाचित हुए। 2003 में जब वसुंधरा राजे की अगुआई में राज्य में बीजेपी की सरकार बनी तो उन्हें संसदीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2008 में वह फिर विधायक निर्वाचित हुए। 2013 में लगातार तीसरी बार ओम बिड़ला विधानसभा की चौखट पार करने में कामयाब रहे। 2014 के आम चुनाव में उन्हें बीजेपी ने कोटा-बूंदी संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया और वह पहली बार सांसद बने। 56 साल के ओम बिड़ला ने लगातार दूसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता है। 17वीं लोकसभा के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के रामनारायण मीणा को 2 लाख 79 हजार 677 वोटों से करारी शिकस्त दी। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राजपरिवार से आने वाले कांग्रेस के इज्यराज सिंह को 2 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। ओम बिड़ला की पत्नी अमिता बिड़ला का कहना है, यह हमारे लिए बहुत गर्व और खुशी का मौका है। हम उन्हें इस पद के लिए चुने जाने पर कैबिनेट के प्रति आभारी हैं।
कुशल संगठनकर्ता की छवि
ओम बिड़ला राजस्थान के हाड़ौती इलाके (कोटा संभाग) से आते हैं, जिसे बीजेपी का गढ़ माना जाता है। इस इलाके में कोटा, बूंदी, बारां और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का गृहक्षेत्र झालावाड़ भी शामिल है। बिड़ला की छवि कुशल संगठनकर्ता की रही है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) में काम करते हुए उनके पास संगठन का अच्छा अनुभव रहा है। वह कोटा भारतीय जनता युवा मोर्चा के 4 साल तक जिलाध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्हें प्रमोट करते हुए राजस्थान भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। वह 6 साल तक इस पद पर रहे। इसके साथ ही बिड़ला लगातार 6 साल तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे। हाड़ौती इलाके में उनका बूथ मैनेजमेंट जबर्दस्त रहा है। 2018 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर के बावजूद कोटा दक्षिण सीट पर बीजेपी जीत हासिल करने में कामयाब रही।
यूथ को साथ लेकर चलने की क्षमता
राजस्थान की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले एक विश्लेषक कहते हैं, ‘युवाओं को साथ लेकर चलना ओम बिड़ला की खासियत है। वह स्थानीय युवाओं में आसानी से घुल-मिल जाते हैं। इसके साथ ही खेलकूद जैसी गतिविधियों में भी उनकी काफी दिलचस्पी है।’ युवाओं के बीच पैठ होने की एक वजह उनके छात्र राजनीति वाले बैकग्राउंड को भी माना जाता है। कॉलेज लाइफ के दौरान उन्होंने राजस्थान कॉलेज आॅफ कॉमर्स कोटा के जॉइंट सेक्रटरी का चुनाव जीता था। यही नहीं 1979 में महज 17 वर्ष की उम्र में वह गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल गुमानपुरा में स्टूडेंट्स असोसिएशन के प्रेजिडेंट भी बने।

समाज सेवा का मिशन
26 जनवरी 2001 को गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप में बिड़ला ने प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए डॉक्टरों के साथ 100 सदस्यों की टीम की अगुआई की। इस दौरान लगातार 10 दिन तक लोगों को भोजन और दवाएं मुहैया कराई गईं। बारां जिले में सहरिया जनजाति के बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए उन्होंने मिशन चलाया। इसके अलावा कोटा में आईआईटी की स्थापना के लिए उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व किया। बूंदी के लोगों को चंबल का पानी मुहैया कराने के लिए भी बिड़ला ने मुहिम छेड़ी थी।
अब तक ये रहे हैं लोकसभा के स्पीकर, देखें लिस्ट
राजस्थान में 13वीं विधानसभा के कार्यकाल में बिड़ला ने 500 सवाल पूछे थे

पर्यावरण प्रेमी
अपने संसदीय क्षेत्र में बिड़ला की पहचान पर्यावरण संरक्षण उपायों के लिए भी है। उन्होंने ग्रीन कोटा मिशन के तहत पेड़ लगाने के लिए लोगों को काफी प्रेरित किया। शहर में प्रदूषण का प्रभाव कम करने और हरियाली लौटाने के लिए इस अभियान के दौरान 1 लाख पौधे लगाए गए। पर्यावरण जागरूकता के कार्यक्रमों में भी उनकी काफी दिलचस्पी है।

वसुंधरा राजे ने दी बधाई
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कोटा सांसद ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाए जाने पर खुशी जताई और कहा कि यह राजस्थान के लिए गर्व की बात है। उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अन्य लोगों को भी कोटा सांसद ओम बिरला को शुभकामनाएं देनी चाहिए।