Thursday, April 9th, 2026

क्रिकेट अपडेट: गाबा में बारिश का साया और मिलर की एक गलती से याद आया 1986 का ऐतिहासिक टेस्ट

बारिश से धुला गाबा टी-20, सीरीज भारत के नाम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गाबा में खेला जाने वाला पांचवां और आखिरी टी-20 इंटरनेशनल मैच आखिरकार बारिश की भेंट चढ़ गया। लगातार हो रही झमाझम बारिश ने खेल को आगे बढ़ने ही नहीं दिया, जिससे यह मुकाबला रद्द करना पड़ा। इस निराशाजनक अंत के बावजूद सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने अपना शानदार रिकॉर्ड बरकरार रखते हुए पांच मैचों की यह सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। खेल रोके जाने तक भारतीय टीम काफी अच्छी लय में दिख रही थी। सिर्फ 4.5 ओवर के खेल में ही भारत ने बिना कोई विकेट खोए बोर्ड पर 52 रन टांग दिए थे। शुरुआत में बिजली गिरने की आशंका के चलते अंपायरों ने खेल रोका था, लेकिन कुछ ही देर में तेज बारिश शुरू हो गई। बीच में कुछ समय के लिए बारिश थमी जरूर थी और गाबा से अच्छी खबरें आने लगी थीं, लेकिन हालात फिर बिगड़ गए और अंततः मैच को रद्द घोषित कर दिया गया।

मिलर की वह चूक जिसने दिल्ली कैपिटल्स को डुबोया एक तरफ जहां गाबा में बारिश ने खेल का मजा किरकिरा किया, वहीं आईपीएल 2026 में एक खिलाड़ी के गलत फैसले ने पूरी टीम की नैया डुबो दी। बुधवार को अरुण जेटली स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस के बीच एक बेहद रोमांचक मुकाबला खेला गया। इस मैच में दिल्ली को महज एक रन से हार का सामना करना पड़ा और इस हार की वजह डेविड मिलर के एक फैसले को माना जा रहा है। मैच जब बेहद नाजुक मोड़ पर था, तब मिलर ने स्ट्राइक रोटेट करने यानी एक रन लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने खुद पर भरोसा जताते हुए आखिरी गेंद पर दो रन बनाने का जोखिम उठाया। यह दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया और दिल्ली कैपिटल्स मैच हार गई। अगर मिलर ने वह सिंगल ले लिया होता और दूसरे छोर पर खड़े कुलदीप यादव आखिरी गेंद पर रन नहीं भी बना पाते, तो कम से कम मैच टाई हो जाता। इससे दिल्ली के पास सुपर ओवर में अपनी गलती सुधारने का मौका जरूर बचता।

रवि शास्त्री के उस ऐतिहासिक सिंगल की यादें ताजा मिलर की इस जिद ने क्रिकेट जगत में 1986 के उस मशहूर चेन्नई टेस्ट की चर्चाएं फिर से तेज कर दी हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए उस मुकाबले के पांचवें दिन भारत को जीत के लिए 348 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए आखिरी पलों में 2 रन चाहिए थे। हाथ में सिर्फ एक विकेट बाकी था और मैच के तीनों नतीजे संभव थे। उस भारी दबाव वाले हालात में रवि शास्त्री ने समझदारी दिखाते हुए ऑफ-स्पिनर ग्रेग मैथ्यूज की गेंद पर लेग साइड में खेलकर एक रन चुरा लिया और स्ट्राइक मनिंदर सिंह को दे दी। मनिंदर अगली ही गेंद पर बिना खाता खोले एलबीडब्ल्यू आउट हो गए और मैच टाई हो गया। 1960 में ब्रिस्बेन टेस्ट के बाद यह क्रिकेट इतिहास का केवल दूसरा टाई टेस्ट था। शास्त्री 40 गेंदों पर 48 रन बनाकर नॉन-स्ट्राइकर एंड पर ही खड़े रह गए। शास्त्री के उस एक रन से भले ही भारत मैच नहीं जीत पाया, लेकिन टीम हारने से जरूर बच गई। अगर भारत वह मैच हार जाता, तो तीन मैचों की सीरीज में 0-1 से पिछड़ जाता।

जो मिलर नहीं कर सके, वह इफ्तिखार ने कर दिखाया जिस दिन मिलर अपनी गलती से दिल्ली को मैच हरवा बैठे, ठीक उसी दिन पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में बिल्कुल वैसी ही स्थिति देखने को मिली। कराची के नेशनल स्टेडियम में हैदराबाद किंग्समेन और पेशावर जाल्मी के बीच मुकाबला चल रहा था। जाल्मी को आखिरी दो गेंदों पर दो रन की दरकार थी और स्ट्राइक पर इफ्तिखार अहमद मौजूद थे। मिलर के उलट, इफ्तिखार ने सूझबूझ से काम लिया और चुपचाप एक रन लेकर स्ट्राइक आमेर जमाल को सौंप दी। जमाल ने समझदारी दिखाते हुए एक और रन दौड़ लिया और अपनी टीम को चार विकेट से शानदार जीत दिला दी। इस मैच में 15 रनों की अहम पारी खेलने के साथ-साथ चार विकेट झटकने वाले इफ्तिखार को उनके बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी चुना गया।