Saturday, August 30th, 2025

विश्व चैंपियनशिप: एच.एस. प्रणॉय की यादगार लड़ाई, रोमांचक मुकाबले में एंटोनसेन ने जीती हारी हुई बाजी

भारतीय बैडमिंटन के अनुभवी सितारे एच.एस. प्रणॉय ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। 33 साल की उम्र में विश्व चैंपियनशिप के दूसरे दौर में दुनिया के नंबर 2 खिलाड़ी एंडर्स एंटोनसेन के खिलाफ खेलते हुए, प्रणॉय ने अपने शानदार करियर के एक और अध्याय को लगभग सुनहरे अक्षरों में लिख दिया था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और एक बेहद करीबी मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

आखिरी पलों में हार

यह मुकाबला किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। प्रणॉय, जिन्होंने 2023 में विक्टर एक्सेलसन जैसे दिग्गज को हराकर विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था, एक और डेनिश खिलाड़ी को चौंकाने की कगार पर थे। लेकिन एक घंटे से ज़्यादा चले इस मैराथन मैच का अंत बेहद नाटकीय रहा। एंटोनसेन ने दो मैच पॉइंट बचाते हुए इस मुकाबले को 8-21, 21-17, 21-23 से अपने नाम कर लिया। यह हार प्रणॉय के लिए दिल तोड़ने वाली थी, लेकिन उनके प्रदर्शन ने दुनिया भर के बैडमिंटन प्रशंसकों का दिल जीत लिया।

हार न मानने का जज्बा

प्रणॉय की खासियत है कि वे मुश्किल परिस्थितियों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। पिछले साल पेरिस ओलंपिक में स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने के बाद, इस बार विश्व चैंपियनशिप में भी उन्हें शुरुआत में ही एक कठिन प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ा। लेकिन प्रणॉय ने हार नहीं मानी। उनका खेलने का एक खास अंदाज़ है – पहला सेट हारना और फिर असली खेल शुरू करना। इसी रणनीति से उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में एक्सेलसन को हराया था, एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था और थॉमस कप में यादगार जीत दिलाई थी। इस बार यह रणनीति जीत तो नहीं दिला सकी, लेकिन उन्होंने एंटोनसेन को गंभीर मुश्किल में ज़रूर डाल दिया था। प्रणॉय की यही खासियत है कि वे सिर्फ वर्तमान में खेलते हैं – पिछले पॉइंट का उन पर कोई असर नहीं होता और न ही वे अगले पॉइंट की चिंता करते हैं।

मैच के निर्णायक पल

पहला सेट आसानी से हारने के बाद, प्रणॉय ने दूसरे सेट में शानदार वापसी की। दोनों खिलाड़ियों के बीच ज़बरदस्त टक्कर देखने को मिली। जब दूसरे सेट में स्कोर 13-14 था, प्रणॉय ने एक बेहतरीन क्रॉसकोर्ट ड्रॉप शॉट खेलकर स्कोर 14-14 से बराबर किया। इसके बाद 16-16 के स्कोर पर एक क्रॉस स्मैश और फिर 18-17 पर एक बैकहैंड क्रॉस स्लाइस के साथ उन्होंने दिखा दिया कि वे हार मानने वालों में से नहीं हैं। निर्णायक गेम में भी स्कोर लगभग बराबर चलता रहा, और प्रणॉय ने अपने सटीक शॉट्स और नियंत्रण से एंटोनसेन पर लगातार दबाव बनाए रखा। दबाव जितना अधिक होता है, उनके शॉट की गुणवत्ता उतनी ही बेहतर हो जाती है, और यह इस मैच में साफ़ दिखाई दे रहा था।

एंटोनसेन की प्रतिक्रिया और अगला मुकाबला

मैच के बाद, दूसरे वरीयता प्राप्त एंडर्स एंटोनसेन ने भी माना कि वह लगभग टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे। उन्होंने कहा, “किसी तरह मैं मैच में बना रहा, कुछ अच्छे पॉइंट्स खेले और किस्मत ने भी मेरा साथ दिया। आखिर में यह सब किस्मत का खेल है, जहाँ छोटी-छोटी चीजें बड़ा अंतर पैदा करती हैं… मैं इस टूर्नामेंट से लगभग बाहर हो गया था, लेकिन अब मैं पूरी तरह से वापस आ गया हूँ।”

अब एंटोनसेन का अगला मुकाबला फ्रांस के टोमा पोपोव से होगा। दोनों के बीच हुए पिछले 10 मुकाबलों में एंटोनसेन ने ही जीत हासिल की है, लेकिन उनमें से कई मुकाबले बेहद करीबी रहे हैं। उम्मीद है कि जब दोनों फिर से भिड़ेंगे तो प्रशंसकों को एक और रोमांचक लड़ाई देखने को मिलेगी।