देश में रेल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने और इंफ्रास्ट्रक्चर को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने दो बड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने झारखंड, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई है, वहीं दूसरी तरफ देश की पहली हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन का काम अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।
कनेक्टिविटी को नया आयाम और हजारों करोड़ का निवेश
रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 6,405 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस फैसले की जानकारी देते हुए विश्वास जताया कि ये प्रोजेक्ट्स न केवल कनेक्टिविटी और व्यापार को सुगम बनाएंगे, बल्कि स्थिरता (sustainability) की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होंगे। पीएम ने जोर दिया कि विभिन्न राज्यों को कवर करने वाली ये लाइनें वाणिज्यिक गतिविधियों में तेजी लाएंगी।
झारखंड और बिहार के लिए बड़ी सौगात
मंजूर की गई पहली परियोजना 133 किलोमीटर लंबी कोडरमा-बरकाकाना रेलवे लाइन के दोहरीकरण से जुड़ी है। यह प्रोजेक्ट झारखंड और बिहार के रेल यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। दरअसल, इस लाइन के दोहरे हो जाने से पटना और रांची के बीच रेल यातायात सुगम होगा और यह दोनों राजधानियों के बीच सबसे छोटा और कुशल रेल लिंक बन जाएगा।
यह ट्रैक झारखंड के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे माल ढुलाई में बड़ी राहत मिलेगी। कोडरमा, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जैसे जिलों में कनेक्टिविटी का विस्तार होगा। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस परियोजना के धरातल पर उतरने से करीब 938 गांवों की 15 लाख की आबादी सीधे तौर पर लाभान्वित होगी। इंजीनियरिंग के लिहाज से भी यह एक विशाल प्रोजेक्ट है, जिसमें 17 बड़े पुल, 180 छोटे पुल, 42 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) और 13 रेलवे अंडर ब्रिज (RUB) का निर्माण शामिल है।
पर्यावरण संरक्षण और दक्षिण भारत को लाभ
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना के पर्यावरणीय पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कोडरमा-बरकाकाना मार्ग से अतिरिक्त 30.4 मिलियन टन माल की ढुलाई संभव हो सकेगी। यदि इतनी ही ढुलाई सड़क मार्ग से की जाती, तो सालाना 32 करोड़ लीटर डीजल खर्च होता। रेल मार्ग के उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में जो कमी आएगी, वह लगभग 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
इसके अलावा, दूसरी प्रमुख परियोजना दक्षिण भारत के लिए है। कैबिनेट ने 185 किलोमीटर लंबी बल्लारी-चिकजाजुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को भी मंजूरी दी है। 3,342 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना कर्नाटक के बल्लारी और चित्रदुर्ग जिलों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से होकर गुजरेगी, जिससे इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
बुलेट ट्रेन: सपना अब हकीकत के करीब
परंपरागत रेल लाइनों के विस्तार के साथ ही भारत के ‘हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर’ के सपने को पूरा करने की दिशा में भी बड़ी खबर सामने आई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसने 56 प्रतिशत भौतिक प्रगति (physical progress) पूरी कर ली है।
अब तक इस महात्वाकांक्षी परियोजना पर 85,338 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि पूर्ण होने पर इसकी कुल अनुमानित लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये है। यह प्रोजेक्ट सरकार के उन चुनिंदा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिनकी निगरानी सीधे पीएमओ और उच्च स्तरीय कमेटियों द्वारा की जा रही है।
कब शुरू होगा सफर और कितनी होगी रफ्तार?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, देश की पहली बुलेट ट्रेन का उद्घाटन अगस्त 2027 में किया जाएगा। शुरुआत में यह ट्रेन सूरत और वापी के बीच 100 किलोमीटर के खंड पर दौड़ती नजर आएगी। हालांकि, पूरे 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के दिसंबर 2029 तक पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है।
इस कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। पहले चरण में वापी-सूरत, फिर वापी-अहमदाबाद और ठाणे-अहमदाबाद जैसे खंडों को शुरू करने की योजना है। अंत में मुंबई-अहमदाबाद सेक्शन के शुरू होने के साथ ही यह पूरा रूट ऑपरेशनल हो जाएगा।
रफ्तार के मामले में यह ट्रेन भारतीय रेलवे की तस्वीर बदल देगी। 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलने वाली यह ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी को महज 1 घंटे 58 मिनट में तय कर लेगी, बशर्ते यह केवल चार प्रमुख स्टेशनों पर रुके। यदि ट्रेन सभी 12 स्टेशनों पर रुकती है, तब भी यह सफर सिर्फ 2 घंटे 17 मिनट में पूरा हो जाएगा, जो मौजूदा समय के मुकाबले एक क्रांतिकारी बदलाव होगा।