मुख्य बातें:
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48वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) से पहले रिलायंस के शेयरों में 1% से ज़्यादा की गिरावट।
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रूस से तेल आयात पर अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक तनावों का बाज़ार पर असर।
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विश्लेषकों का मानना है कि गिरावट के बावजूद शेयर का मूल्यांकन आकर्षक बना हुआ है।
AGM से पहले दबाव
गुरुवार को अपनी 48वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) से ठीक पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयर की कीमत में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस बैठक में चेयरमैन मुकेश अंबानी लगभग 44 लाख शेयरधारकों को संबोधित करने वाले हैं। बीएसई पर रिलायंस का शेयर 1.23% तक गिरकर ₹1,368.25 पर आ गया।
बाजार की चिंताएं और वैश्विक तनाव
यह AGM शुक्रवार, 29 अगस्त को होने वाली है, लेकिन बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और भारत पर हाल ही में लगाए गए अमेरिकी टैरिफ के कारण बाजार के भागीदार सतर्क रुख अपना रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल आयात करने पर भारत पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। रूस के कच्चे तेल के देश के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक होने के नाते, RIL इस कदम से सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है।
निवेशकों को AGM से उम्मीदें
निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी रहेंगी कि मुकेश अंबानी कच्चे तेल की सोर्सिंग पर क्या कहते हैं। इसके साथ ही, कंपनी की टेलीकॉम शाखा जियो के बहुप्रतीक्षित आईपीओ पर अपडेट और अपने विभिन्न व्यवसायों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की रणनीति पर भी निवेशकों का ध्यान रहेगा।
इस हालिया गिरावट के बावजूद, रिलायंस के शेयर ने 2025 में अब तक 12% की बढ़त हासिल की है, जो बेंचमार्क निफ्टी 50 की 4.5% की बढ़त से काफी बेहतर प्रदर्शन है। इस रैली के बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का मूल्यांकन अभी भी आकर्षक है और वे स्टॉक पर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए हुए हैं।
विश्लेषकों का नजरिया और मूल्यांकन
जेपी मॉर्गन के अनुसार, RIL दो मामलों में अभी भी सस्ता दिखाई देता है:
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होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट: यह डिस्काउंट 2025 में मामूली रूप से ही कम हुआ है, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी कंपनियों भारती एयरटेल और एवेन्यू सुपरमार्ट्स (डीमार्ट) के मूल्यांकन में भी वृद्धि हुई है, जिससे RIL का तुलनात्मक मूल्य प्रस्ताव बना हुआ है।
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रिटेल मूल्यांकन: रिलायंस रिटेल का EV/EBITDA मल्टीपल डीमार्ट की तुलना में बड़े डिस्काउंट पर बना हुआ है।
जेपी मॉर्गन ने कमोडिटी स्प्रेड में सुधार, संभावित टेलीकॉम टैरिफ बढ़ोतरी, त्योहारी सीजन की मांग और संभावित जीएसटी कटौती को स्टॉक के लिए निकट भविष्य के प्रमुख चालक बताया है। उनका मानना है कि हालिया गिरावट का एक कारण रूस से तेल की खरीद और अमेरिकी/यूरोपीय कार्रवाई का जोखिम हो सकता है। यदि ये मुद्दे कम होते हैं तो स्टॉक में रिकवरी आ सकती है। जेपी मॉर्गन ने स्टॉक पर ‘ओवरवेट‘ रेटिंग और सितंबर 2026 के लिए ₹1,695 का लक्ष्य मूल्य दिया है।
वित्तीय प्रदर्शन और ब्रोकरेज का भरोसा
RIL की वार्षिक रिपोर्ट से मिली नई जानकारियों के बाद, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ब्रोकरेज फर्मों ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर अपना सकारात्मक रुख दोहराया है। रिपोर्ट के अनुसार, समेकित परिचालन नकदी प्रवाह (OCF) साल-दर-साल 10% बढ़कर $20.9 बिलियन हो गया, जबकि जियो ने $1.8 बिलियन और रिटेल ने $0.66 बिलियन का फ्री कैश फ्लो (FCF) दर्ज किया।
टेलीकॉम सेक्टर: वैल्यू पर फोकस
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज मैक्वेरी का मानना है कि रिलायंस जियो का केवल सब्सक्राइबर संख्या बढ़ाने के बजाय वैल्यू को प्राथमिकता देना, उसे भारती एयरटेल की तुलना में बेहतर EBITDA वृद्धि प्रदान करेगा। इसी के चलते ब्रोकरेज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर ‘आउटपरफॉर्म‘ कॉल के साथ लक्ष्य मूल्य बढ़ाकर ₹1,650 कर दिया है।
FMCG में नई शुरुआत
वैश्विक ब्रोकिंग हाउस जेफरीज ने उल्लेख किया कि RIL ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) के निर्माण के साथ FMCG क्षेत्र में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है। कंपनी ने पहले ही दस लाख आउटलेट्स का वितरण नेटवर्क बना लिया है। हालांकि, जेफरीज का मानना है कि इस क्षेत्र में सफलता मजबूत निष्पादन पर निर्भर करेगी, क्योंकि मौजूदा खिलाड़ी काफी मजबूत हैं और स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं।
नई ऊर्जा: भविष्य का दांव
घरेलू वित्तीय सेवा फर्म, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, रिलायंस की नई ऊर्जा शाखा आने वाले कुछ वर्षों में निवेश का मुख्य फोकस क्षेत्र होगी। RIL की योजना ‘रेत से सोलर मॉड्यूल’ तक का एकीकृत कारोबार स्थापित करने की है और साथ ही चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान करने के लिए विश्व स्तरीय बैटरी स्टोरेज समाधान स्थापित करने की है। यह हरित हाइड्रोजन उत्पादन को भी शक्ति प्रदान करेगा।